मन में बसाकर तेरी मूर्ति भजन सगुण भक्ति पर आधारित है इसमें श्री कृष्ण जी को गिरिधर (पहाड़ को धारण करने वाला ) के नाम से पुकारा गया है भक्त अपने इष्ट देव कान्हा जी को अपने मन में बसा कर उनकी पूजा करना चाहता है
मन में बसाकर तेरी मूर्ति उतारू में गिरिधर तेरी आरती
मन में बसाकर तेरी मूर्ति उतारू में गिरिधर तेरी आरती
पहरा - 1
करुणा करो, कष्ट हरो, ज्ञान दो भगवन, भव में फँसी नाव मेरी, तार दो भगवन।
करुणा करो, कष्ट हरो, ज्ञान दो भगवन, भव में फँसी नाव मेरी, तार दो भगवन।
दर्द की दवा तुम्हरे पास है, ज़िंदगी दया की है भीख माँगती,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति उतारू में गिरिधर तेरी आरती
पहरा - 2
माँगूँ तुझसे क्या मैं, यही सोचूँ भगवन, ज़िंदगी जब तेरे नाम कर दी अर्पण (x2)
सब कुछ तेरा, कुछ नहीं मेरा, चिंता है तुझको प्रभु संसार की,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति उतारू में गिरिधर तेरी आरती
पहरा - 3
वेद तेरी महिमा गाएँ, संत करें ध्यान, नारद गुणगान करें, छेड़े वीणा तान (x2)
भक्त तेरे द्वार करते हैं पुकार, दास अनिरुद्ध तेरी गाए आरती,
मन में बसाकर तेरी मूर्ति उतारू में गिरिधर तेरी आरती
मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारू मैं गिरधर तेरी आरती
मन में बसाकर तेरी मूर्ति, उतारू मैं गिरधर तेरी आरती