Shree krishan chalisa - श्री कृष्ण चालीसा
प्रकाशित December 02, 2025
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॥ दोहा ॥ 

बंशी शोभित कर मधुरी, नील जलद समान। दीनबन्धु यह विरद कहूँ, नमामि कृष्ण भगवान॥ नमो कृष्ण करूणामय, नमो वासुदेव। देवकी नन्दन नमो, नमो यदुपति देव॥

॥ चौपाई ॥ 

जय यदुनन्दन जय जग वन्दन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥ जय यशोदा सुत नन्द दुलारे। जय त्रिभुवन के नयन तारे॥

जय कंस निकन्दन कंसारे। जय श्री कृष्ण भक्तन हितकारे॥ जय गोपीजन मनके प्यारे। जय गौएँ चरनिहारे॥

जय पूतना कालिका मारे। जय बालक रूप अति प्यारे॥ जय हो मखखन चोर कन्हैया। बंसीधर मोहिनी रैय्या॥

जय हो मायाजाल रचैया। जय जगतबन्धु जय करवैया॥ जय राधा संग रास रचैया। जय हो कृष्ण देवकी मैय्या॥

जय हो कंसनाल रिपुजैया। जय हो परमानन्द कन्हैया॥ जय हो यशोदा मैय्या लाला। जय हो परमानन्द गोपाला॥

गोकुल में जो करी क्रीड़ा। माखन चोरी दही का बीड़ा॥ कान्हा ब्याह रचावहु जाई। राधा संग जो ब्याही आई॥

राधा कृष्ण बने वर राई। सब नर नारी हर्ष बनाई॥ करि रास रंग केलि दुलारी। गोकुल की नर नारि सब प्यारी॥

बनसी बजाइ जब सुन्दरी। सब नर नारि भई मन मन्जरी॥ श्याम सलोने कान्हा प्यारे। मनमोहन मदन मुरारे॥

जब पूतना विष देने आई। बालक रूप तने नशवाई॥ कंस के त्रास मिटाया सारा। नन्द यशोदा कान्हा प्यारा॥

कालीदह नाग नाथ कर लीन्हा। वृन्दावन में रास रच दीन्हा॥ गोपियन संग रास रचाई। मन भावन मोहन कन्हाई॥

अक्रूर जब कंस बुलायो। मात पिता का हाल सुनायो॥ कंस के दर जाने से पहले। बलराम संग मथुरा खेले॥

कंस के सब दुख दूर करायो। मात पिता को मुक्त करायो॥ अग्रसेन को राज दिलायो। मात पिता को सुख उपजाओ॥

महाभारत में ज्ञान सुनायो। धर्म कर्म का मर्म बताया॥ अनाथों के नाथ कहायो। शिशुपाल की जान गँवायो॥

जय हो द्वारकानाथ दयाला। जय हो गोकुल के गोपाला॥ नमो नमो श्री कृष्ण मुरारी। जग में पूजे जावो सुखकारी॥

॥ दोहा ॥

श्री कृष्ण चालीसा पढ़ै, जो नर चित्त लगाय। जनम जनम के पाप कटै, वैकुण्ठ में जाय॥ नमो कृष्ण करूणामय, नमो वासुदेव। दीनबन्धु यह विरद कहूँ, नमामि कृष्ण देव॥