Kuber chalisa - कुबेर चालीसा
प्रकाशित September 14, 2025
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कुबेर चालीसा धन दौलत के देवता भगवान कुबेर जी को समर्पित है, चालीसा में कुबेर जी को स्वर्ग द्वारा अधिक पर खड़े विष्णु को हरने वाले और शरण में भक्तों को धन-दौलत देने वाले बताया गया है।
                     ॥ दोहा ॥
जैसे अटल हिमालय, और जैसे अडिग सुमेर।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै, अविचल खड़े कुबेर॥
विघ्न हरण मंगल करण, सुनो शरणागत की टेर।
भक्त हेतु वितरण करो, धन माया के ढ़ेर॥

                       ॥ चौपाई ॥
जै जै जै श्री कुबेर भंडारी। धन माया के तुम अधिकारी।।
तब तेज पुंज निर्भय भय भारी।  पवन वेग सम सम तनु बलधारी।।
स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी। सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी॥
यक्ष यक्षणी की है सेना भारी।  सेनापति बने युद्ध में धनुधारी॥
महा योद्धा बन शास्त्र धारे। युद्ध करें शत्रु को मारे।।
सदा विजयी कभी ना हारैं। भगत जनों के संकट टारैं॥
प्रपितामह हैं स्वयं विधाता।  पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता॥
विश्व पिता ईडविदडा जी माता ।विभीषण भगत आपके भ्राता।।
शिव चरणों में जब ध्यान लगाया । घोर तपस्या करी तन को सुखाया।।
शिव वरदान मिले देवत्य पाया। अमृत पान करी अमर हुई काया॥
देव कुबेर को जो मन में धारे। सदा विजय हो कभी न हारे॥
बिगड़े काम बन जाएं सारे। अन्न धन के रहें भरे भण्डारे॥
कुबेर गरीब को आप उभारैं। कुबेर कर्ज को तुरंत उतारैं॥
कुबेर भरे को और भरादे। कुबेर खाली को तुरन्त भरादे॥
कुबेर टूटे को तुरंत बनावैं। अड़े काम को कुबेर बनावैं॥
रोग शोक को कुबेर नशावैं। कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं॥
कुबेर चढ़े को और चढ़ा दे । कुबेर गिरे को पुनः उठा दे।।
कुबेर भाग्य को तुरंत  जगा दे ।कुबेर भूले कोर बता दे।।
प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे। भूखे की भूख कुबेर मिटा दे॥
रोगी को रोग कुबेर घटा दे। दुखिया का दुख कुबेर छुट्टा दे।।
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
                ॥ दोहा ॥
शिव भक्तों में अग्रणी, श्री यक्षराज कुबेर।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर, कर दो दूर अंधेर॥
कर दो दूर अंधेर अब जरा करो ना देर।
शरण पड़ा हूं आपकी, दया की दृष्टि फेर॥