Sheesh Gang Ardhang Parvati Bhajan - शिव गंग अर्धंग पार्वती सदा विराजत केलसी का अर्थ है - शिव जी शीश पर गंगा जी विराजमान है , अर्धांग पार्वती का मतलब पार्वती जी उनकी पत्नी है और अंतिम शब्द सदा विराजत कैलासी यानी हमेशा कैलाश पर्वत पर रहने वाले
शीश गंग, अर्धांग पार्वती, सदा विराजत कैलासी।
नदी भृंगी नृत्य करते है , धरत ध्यान सुर सुखरासी
पहरा 1:
कैलाश का वातावरण शीतल मन्द सुगन्ध पवन, बह,
बैठे हैं शिव अविनाशी। करत गान गन्धर्व सप्त स्वर,
राग रागिनी मधुरासी॥ शीश गंग, अर्धांग पार्वती...
पहरा 2:
शिव का गण-समूह यक्ष-रक्ष-भैरव जहाँ डोलत,
बोलत हैं वनके वासी। कोयल शब्द सुनावत सुन्दर,
भ्रमर करत हैं गुँजा-सी॥ शीश गंग, अर्धांग पार्वती...
पहरा 3:
कैलाश की शोभा कल्पद्रुम (इच्छा पूरी करने वाला वृक्ष) अरु पारिजात तरु,
लाग रहे हैं लक्षासी। कामधेनु कोटिन जहाँ डोलत,
करत दुग्ध की वर्षा-सी॥शीश गंग, अर्धांग पार्वती...
पहरा 4:
शिव की महिमा ऋद्धि-सिद्धि के दाता शंकर,
नित सत् चित् आनन्दराशी। जिनके सुमिरत ही कट जाती,
कठिन काल यम की फांसी॥ शीश गंग, अर्धांग पार्वती...
पहरा 5:
भक्त की विनय त्रिशूलधर जी का नाम निरन्तर,
प्रेम सहित जो नर गासी दूर होय उस नर की
जन्म-जन्म शिवपद पासी॥ कैलासी काशी के वासी,
अविनाशी मेरी सुध लीजो सेवक जान साधा चरणन को
अपनो जान कृपा कीजो॥शीश गंग, अर्धांग पार्वती