Shri saraswati ashtakam - श्री सरस्वती अष्टकम्
प्रकाशित September 14, 2025
468 views

श्री सरस्वती अष्टकम का अर्थ ज्ञान ,वाणी और संगीत के देवी माता सरस्वती की स्तुति के आठ श्लोकों का संग्रह । अष्टकम में देवी माँ के सुंदर और निर्मल रूप का वर्णन करते हुए उन्हें स्फेद वस्त्र , वीणा , पुस्तक धारण करने वाली कहा गया है ।
 ॥ श्री सरस्वती अष्टकम् ॥
(पद्मपुराणान्तर्गतम्)
    ॥ शतानीक उवाच ॥
महामते महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद। 
अक्षीणकर्मबन्धस्तु पुरुषो द्विजसत्तम॥ 
मरणे यज्जपेज्जाप्यं यं च भावमनुस्मरन्। 
परं पदमवाप्नोति तन्मे ब्रूहि महामुने॥ 
     ॥ शौनक उवाच ॥
इदमेव महाराज पृष्टवांस्ते पितामहः। 
भीष्मं धर्मविदां श्रेष्ठं धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः॥ 
      ॥ युधिष्ठिर उवाच ॥
पितामह महाप्राज्ञ सर्वशास्त्रविशारद। 
बृहस्पतिस्तुता देवी वागीशेन महात्मना।
आत्मानं दर्शयामास सूर्यकोटिसमप्रभम्॥ 
    ॥ सरस्वत्युवाच ॥
वरं वृणीष्व भद्रं ते यत्ते मनसि वर्तते।
    ॥ बृहस्पतिरुवाच ॥
यदि मे वरदा देवि दिव्यज्ञानं प्रयच्छ मे॥ 
        ॥ देव्युवाच ॥
हन्त ते निर्मलं ज्ञानं कुमतिध्वंसकारकम्।
स्तोत्रेणानेन ये भक्त्या मां स्तुवन्ति मनीषिणः॥ 
     ॥ बृहस्पतिरुवाच ॥
लभते परमं ज्ञानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥ 
     ॥ सरस्वत्युवाच ॥
त्रिसन्ध्यं प्रयतो नित्यं पठेदष्टकमुत्तमम्।
तस्य कण्ठे सदा वासं करिष्यामि न संशयः॥ 
सरस्वती अष्टकम के जाप से ज्ञान बुद्धि की प्राप्ति  के साथ वाणी में सुधार आने लगता हैं