ललिता माता चालीसा ललिता त्रिपुर सुंदरी माता की स्तुति है , चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में माँ के सुंदर रूप , शक्तियों और महिमाओ का उच्चारण किया गया है ।
॥ दोहा ॥
जय-जय माँ त्रैलोक्य-सुन्दरी, भक्त हृदय विश्राम।
कृपा करो माँ करुणा-मयी, पूर्ण करो सब काम॥
॥ चौपाई ॥
जयति-जयति जय ललिते माता।तव गुण महिमा है विख्याता॥
तू सुन्दरी,त्रिपुरेश्वरी देवी सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥
तू कल्याणी कष्ट निवारिणी।तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥
मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी।भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥
आदि शक्ति श्री विद्या रूपा।चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥
हृदय निवासिनी-भक्त तारिणी।नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥
दश विद्या है रूप तुम्हारा।श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा॥
धूमा, बगला, भैरवी, तारा।भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा॥
षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी।ललितेशक्ति तुम्हारी संगी॥
ललिते तुम हो ज्योतित भाला।भक्त जनों का काम संभाला॥
भारी संकट जब-जब आये।उनसे तुमने भक्त बचाए॥
जिसने कृपा तुम्हारी पाई । उसकी सब विधि से बन आई ।
संकट दूर करो माँ भारी।भक्त जनों को आस तुम्हारी॥
त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी।जय जय जय शिव की महारानी॥
योग सिद्धि पावें सब योगी।भोगें भोग महा सुख भोगी॥
आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी।महाशक्ति जय-जय, भय हारी॥
कुल योगिनी, कुंडलिनी रूपा।लीला ललिते करे अनूपा॥
महा-महेश्वरी, महाशक्ति दे।त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे॥
महा महा-नन्दे कल्याणी।मुखों को देती हो वाणी॥
इच्छा, ज्ञान, क्रिया का भागी।होता तब सेवा अनुरागी॥
जो ललिते तेरा गुण गावे । उसे न कोई कष्ट स्तावे
सर्व मंगले, ज्वाला मालिनी।तुम हो सर्वशक्ति संचालिनी॥
आया माँ जो शरण तुम्हारी।विपदा हरी उसी के सारी॥
नामाकर्ष, चेष्टक, आकर्षणी।सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी॥
महिमा तव सब जग विख्याता । तुम हो दयामयी (दया करने वाली) जग माता
सब सौभाग्य दायिनी ललिता।तुम हो सुखदा करुणा कलिता॥
आनंद सुख सम्पत्ति देती हो । कष्ट भयानक हर लेती हो
मन से जो जन तुमको ध्यावे।वह तुरंत मन-वांछित पावे॥
लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली।तुम्हीं शारदा, चक्र-कपाली॥
मूलाधार निवासिनी जय-जय।सहस्रार गामिनी माँ जय-जय॥
छह चक्रों को भेदने वाली।भंडासुर की हृदय विदारिणी॥
सर्व विपति हर, सर्वाधारे।तुमने कुटिल कुपंथी तारे॥
चन्द्र-धारिणी, नैमिषवासिनी।कृपा करो ललिते अधनाशिनी॥
भक्तजनों को दरस दिखाओ।संशय भय सब शीघ्र मिटाओ॥
जो कोई पढ़े ललिता चालीसा।होवे सुख आनंद अधिसा॥
जिस पर कोई संकट आवे।पाठ करे संकट मिट जावे॥
ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बार।पूर्ण मनोरथ होवे सारा॥
पुत्र हीन संतति सुख पावे।निर्धन धनी बने गुण गावे॥
इस विधि पाठ करे जो कोई।दुःख बंधन छूटे सुख होई॥
सबसे लघु उपाय यह जानो।सिद्ध होए मन में जो ठानो॥
ललिता करे हृदय में वासा। सिद्धि देत ललिता चालीसा॥
॥ दोहा ॥
ललिते माँ अब कृपा करो, सिद्ध करो सब काम।
श्रद्धा से सिर नाय कर, करते तुम्हें प्रणाम
जो मनुष्य सच्चे व पवित्र मन से पूरी विधि अनुसार इस पाठ का 21 बार जाप करता है उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और देवी माता की कृपा सदैव बनी रहती है
श्री गायत्री चालीसा माँ महाकाली चालीसा गोपाल चालीसा